जिस किसी व्यवहार (मुकदमे) में जो शासन-व्यवस्था के अनुसार निर्णीत कर लिया गया हो और जो दण्डविधमान कर दिया गया हो; उसे धर्मपूर्वक किया हुआ जानना चाहिये और उसमें (निष्कारण) परिवर्तन नहीं करना चाहिये (तथा किसी कारण-विशेष के होने पर तो परिवर्तन भी करना ही चाहिये)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।