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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 232
कूटशासनकर्तृश्च प्रकृतीनां च दूषकान्‌ । स्त्रीबालब्राह्मणघ्नांश्च हन्याद्द्विटसेविनस्तथा ।।
कपटपूर्वक राजाज्ञा लिखने वाले, प्रकृति (मन्त्री, सेनापति आदि परिजनों) को फोड़ने वाले तथा स्त्री, बालक और ब्राह्मणों की हत्या करने वालो एवं शत्रु का सेवन करने वालों का वध करके दण्डित करे।
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