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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 231
ये नियुक्तास्तु कार्येषु हन्युः कार्याणि कार्यिणाम्‌ । धनोष्मणा पच्यमानास्तान्नि:स्वान्कारयेन्नप: ।।
राजा के द्वारा कार्य में नियुक्त जो राजाधिकारी पुरुष घूस आदि के धन की गर्मी (घमण्ड) से कार्य को नष्ट कर दें तो राजा उनकी सम्पत्ति को अपने अधीन कर ले।
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