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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 229
्षत्रविट्शूद्रयोनिस्तु दण्डं दातुमशक्रुवन्‌ । आनृण्यं कर्मणा गच्छेद्विप्रो दद्याच्छनैः शनैः ।।
राजा के द्वारा दण्डित क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र दण्डद्रव्य (जुर्माना) देने में असमर्थ हो तो राजा उनसे काम कराकर दण्डद्रव्य की पूर्ति (वसूली) करे। ब्राह्मण यदि दण्ड द्रव्य देने में असमर्थ हो तो राजा उससे धीरे-धीरे दण्डड्रव्य (जुर्माना) को ग्रहण करे (किन्तु ब्राह्मण से काम कराकर दण्डद्रव्य की पूर्ति न करावे)।
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