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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 226
एते राष्ट्रे वर्तमाना राज्ञः प्रच्छन्नतस्कराः । विकर्मक्रियया नित्यं बाधन्ते भद्रिकाः प्रजाः ।।
राज्य में रहने वाले गुप्त और चौर - ये (पूर्व श्लोकोक्त कितव आदि) विरुद्धाचरण से सज्जन प्रजाओं को पीड़ित करते रहते हैं।
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