मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 225
कितवान्कुशीलवान्क्रूरान्पाषण्डस्थांश्च मानवान्‌ । विकर्मस्थान्‌ शौण्डिकांश्च क्षिप्रं निर्वासयेत्पुरात्‌ ।।
जुआरियों (जुआ खेलने या खेलाने वाले), कुशीलवों (नाचने-गाने वाले), वेद-शा्र के विरोधियों, पाखण्डियों (श्रुति-स्मृति में अकथित व्रतादि धारण करने वाले), आपत्तिकाल नहीं होने पर भी दूसरों की जीविका करने वाले और मद्य बनाने वाले मनुष्यों को राजा राज्य से शीघ्र ही बाहर निकाल दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें