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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 223
अप्राणिभिर्यत्क्रियते तल्लोके द्यूतमुच्यते । प्राणिभिः क्रियते यस्तु स विज्ञेयः समाह्वयः ।।
बिना प्राणी (कौड़ी, पाशा, तास, तीर आदि की निशानेबाजी तथा सट्टा आदि के द्वारा बाजी लगाकर खेलना धूत (जुआ) तथा प्राणियों (मुर्गा, तीतर, बटेर आदि एवं भेड़ा आदि को लड़ाकर तथा कुत्ता, घोड़ा आदि दौड़ाकर-कुत्तारेस, घोड़ारेस आदि) के द्वारा बाजी लगाकर खेलना 'समाह्य' कहलाता है।
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