मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 222
प्रकाशमेतत्तास्कर्यं॑ यद्देवनसमाह्ृयौ । तयोर्नित्यं प्रतीघाते नृपतिर्यत्नवान्भवेत्‌ ।।
द्यूत तथा समाहृय (९।२१३) ये दोनों ही प्रत्यक्ष में चोरी करना (डाका डालना) है अतएव उनको रोकने में राजा को सर्वदा प्रयत्नशील रहना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें