अयमुक्तो विभागो व: पुत्राणां च क्रियाविधिः ।
क्रमशः क्षेत्रजादीनां द्यूतधर्मं निबोधत ।।
(महर्षि भृगुजी मुनियों से कहते हैं कि मैंने) आप लोगों से वह विभाजन का विधान तथा (क्षेत्रज आदि) पुत्रों के भाग (हिस्से) का प्रकार क्रमश: कहा, अब आप लोग द्यूतकर्म को सुनिये।
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