वस्त्रं पत्रमलङ्कारं कृतान्नमुदकं स्त्रियः ।
योगक्षेमं प्रचारं च न विभाज्यं प्रचक्षते ।।
वस्त्र, वाहन, आभूषण, पक्वान्न; जल (कूप आदि सार्वजनिक जलस्थान स्त्रियाँ (दासियाँ), मन्त्री, पुरोहित आदि योगक्षेमसाधक मार्ग इनको (मनु आदि महर्षि) विभाज्य मानते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।