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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 219
वस्त्रं पत्रमलङ्कारं कृतान्नमुदकं स्त्रियः । योगक्षेमं प्रचारं च न विभाज्यं प्रचक्षते ।।
वस्त्र, वाहन, आभूषण, पक्वान्न; जल (कूप आदि सार्वजनिक जलस्थान स्त्रियाँ (दासियाँ), मन्त्री, पुरोहित आदि योगक्षेमसाधक मार्ग इनको (मनु आदि महर्षि) विभाज्य मानते हैं।
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