पिता के धन तथा ऋण का विधिपूर्वक विभाजन (बँटवारा) करने के बाद यदि पिता का कोई धन या उसके द्वारा लिया हुआ ऋण शेष रह गया हो तो उसको सब भाई बराबर-बराबर बाँट लें (उस धन में से ज्येष्ठ भाई को उद्धार अर्थात् अतिरिक्त (९।११२-११५) नहीं मिलेगा।
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