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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 215
भ्रातृणामविभक्तानां यद्युत्थानं भवेत्सह । न पुत्रभागं विषमं पिता दद्यात्कथञ्चन ।।
यदि सम्मिलित रहते हुये सब भाई साथ में ही धनोपार्जन करें तो पिता किसी प्रकार भी किसी पुत्र को अधिक भाग को कदापि न देवे।
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