जो ज्येष्ठ भाई लोभ से छोटे भाइयों को ठगे (पिता के धन में से उन्हें उचित भाग न दे या कम दे), वह ज्येष्ठ भाई के आदर को नहीं पाता, उसका :उद्धार' (अतिरिक्त भाग--९।११२-११५) भी नहीं मिलता तथा वह राजा के द्वारा दण्डनीय होता है।
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