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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 213
यो ज्येष्ठो विनिकुर्वीत लो भाद्‌भ्रातृन्यवीयसः । सोऽज्येष्ठः स्यादभागश्च नियंतव्यश्च राजभिः ।।
जो ज्येष्ठ भाई लोभ से छोटे भाइयों को ठगे (पिता के धन में से उन्हें उचित भाग न दे या कम दे), वह ज्येष्ठ भाई के आदर को नहीं पाता, उसका :उद्धार' (अतिरिक्त भाग--९।११२-११५) भी नहीं मिलता तथा वह राजा के द्वारा दण्डनीय होता है।
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