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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 212
सोदर्या विभजेरंस्तं समेत्य सहिताः समम्‌ । भ्रातरो ये च संसृष्टा भगिन्यश्च सनाभयः ।।
(किन्तु उसके पिता, माता, स्त्री या पुत्र नहीं हों तो) सब सहोदर भाई और बहनें तथा सपत्नी-पुत्रों (सौतेले भाइयों) में से जो सम्मिलत रहते हों, सभी मिलकर उसके भाग में से समान-समान भाग परस्पर में बाँट लें।
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