येषां ज्येष्ठ: कनिष्ठो वा हीयेतांशप्रदानतः ।
प्रियेनान्यतरो वापि तस्य भागो न लुप्यते ।।
जिन भाइयों में से बड़ा या छोटा भाई (विदेश जाने या संन्यासी होने आदि के कारण) भाग से रहित हो जाय अर्थात् अपना भाग नहीं पावे या मर जाय तो उसके १ भाग का लोप (नाश) नहीं होता है।
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