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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 210
विभक्ताः सह जीवन्तो विभजेरन्पुनर्यदि । समस्तत्र विभागः स्याज्ज्यैष्ठ्यं तत्र न विद्यते ।।
पहले कभी अलग हुए भाई पुन: सम्मिलित होकर एकत्र रहने लगें और फिर कभी अलग होना चाहें तो उस समय तक भाइयों का समान भाग होता है, बड़े भाई का 'उद्धार' (९।११२-११५) अर्थात्‌ अतिरिक्त भाग नहीं मिलता है।
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