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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 205
अविद्यानां तु सर्वेषामीहातश्रेद्धनं भवेत्‌ । समस्तत्र विभागः स्यादपित्र्य इति धारणा ।।
बिना पढ़े लिखे सब भाइयों के प्रयत्न (खेती, व्यापार आदि) से यदि धन प्राप्त हो तब पितृ-धन को छोड़कर उस प्रयत्नोपार्जित धन में से ज्येष्ठ भाई का उद्धार (अतिरिक्त भाग) नहीं होता, (किन्तु पिता के धन में से ही वह उद्धार भाग होता है) ऐसा शास्त्रीय निर्णय है।
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