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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 203
यद्यर्थिता तु दारैः स्यात्क्लीबादीनां कथञ्चन । तेषामुत्पन्नतन्तूनामपत्यं दायमर्हति ।।
इन नपुंसक, पतित आदि (९।२०१) को किसी प्रकार विवाह करने की इच्छा हो तो (इनके विवाह होने पर) उत्पन्न (नपुंसक की क्षेत्रज तथा पतितादि की औरस) सन्तान उनके धन पाने की अधिकारिणी होती है।
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