अनंशौ क्लीबपतितौ जात्यन्धबधिरौ तथा ।
उन्मत्तजडमूकाश्च ये च केचिन्निरिन्द्रियाः ।।
नपुंशक, पतित, जन्मान्ध, बहरा, पागल, जड़, गूँगा और जो किसी इन्द्रिय से शून्य (लँगड़ा, लूला आदि) हों, वे धन के भागी (हिस्सेदार) नहीं होते हैं, (किन्तु भोजन वस्त्रमात्र पाते रहने के अधिकारी होते हैं।
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