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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 20
यन्मे माता प्रलुलुभे विचरन्त्यपतिव्रता । तन्मे रेतः पिता वृङ्क्तामित्यस्यैतन्निदर्शनम्‌ ।।
"दूसरे के घर में विचरण करती (जाती) हुई मेरी माता अतिव्रता होती हुई परपुरुष के प्रति लोभयुक्त अर्थात्‌ आकृष्ट हुई, उस (परपुरुष सङ्कल्प) से दूषित माता के रजोरूप वीर्य को मेरे पिता शुद्ध करे" यही पादत्रय स्त्री के व्यभिचार का उदाहरण है।
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