पति आदि आत्मीय जनों को चाहिये कि वे रात-दिन स्त्रियों को स्वाधीन रखें (उनकी देख-भाल किया करें-उन्हें स्वतन्त्र न रहने दें), अनिषिद्ध (रूप-रस आदि) विषयों में आसक्त होती हुई उन्हें अपने वश में करें।
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