मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 2
अस्वतन्त्राः स्त्रियः कार्याः पुरुषैः स्वैर्दिवानिशम्‌ । विषयेषु च सज्जन्त्यः संस्थाप्या आत्मनो वशे ।।
पति आदि आत्मीय जनों को चाहिये कि वे रात-दिन स्त्रियों को स्वाधीन रखें (उनकी देख-भाल किया करें-उन्हें स्वतन्त्र न रहने दें), अनिषिद्ध (रूप-रस आदि) विषयों में आसक्त होती हुई उन्हें अपने वश में करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें