ब्राह्मण की अनेक जातिवाली सन्तान हीन क्षत्रियादि वर्णोवाली स्त्रियो के मरने पर उसके पिता आदि के द्वारा दिये गये पूर्वोक्त (९।१९४) छः प्रकार के ख्री-धन को पाने का. अधिकार सजातीय या विजातीय सपत्नियों की सन्तान रहने पर भी ब्राह्मण जातीया सपत्नी की कन्या को ही होता है और उसके अभाव में उसकी (पुत्री) को अधिकार प्राप्त होता है।
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