मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 198
स्त्रियान्तु यद्भवेद्वित्तं पित्रा दत्तं कथञ्चन । ब्राह्मणी तद्धरेत्कन्या तदपत्यस्य वा भवेत्‌ ।।
ब्राह्मण की अनेक जातिवाली सन्तान हीन क्षत्रियादि वर्णोवाली स्त्रियो के मरने पर उसके पिता आदि के द्वारा दिये गये पूर्वोक्त (९।१९४) छः प्रकार के ख्री-धन को पाने का. अधिकार सजातीय या विजातीय सपत्नियों की सन्तान रहने पर भी ब्राह्मण जातीया सपत्नी की कन्या को ही होता है और उसके अभाव में उसकी (पुत्री) को अधिकार प्राप्त होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें