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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 197
यत्त्वस्याः स्याद्धनं दत्तं विवाहेष्वासुरादिषु । अप्रजायामतीतायां मातापित्रोस्तदिष्यते ।।
आसुर आदि (आसुर, राक्षस तथा पैशाच, क्रमश: ३।३१, ३३ और ३४) संज्ञक विवाहों में स्त्री के लिए जो धन दिया गया हो, सन्तानहीन उस स्त्री के मरने पर पूर्वोक्त (९।१९४) ६ प्रकार के स्त्री-धन को पाने के अधिकारी उसके माता-पिता होते हैं।
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