ब्राह्म, दैव, आर्ष, गान्धर्व और प्राजापत्य संज्ञक (क्रमशः ३।२७, २८, २९, ३०) और ३२ विवाहों से प्राप्त सन्तानहीना स्री के पूर्वोक्त (९।१९४) छः प्रकार बके धन का अधिकारी पति ही होता है ऐसा मनु आदि का मत है।
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