ब्राह्मण के धन को राजा कदापि (मृत ब्राह्मण के धन लेने वाले औरस पुत्रादि के किसी के नहीं रहने पर भी) नहीं लेवे यह शास्त्र मर्यादा है । दूसरे (क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) वर्णो के धन को सब (औरस पुत्रादि) उत्तराधिकारी किसी भी व्यक्ति के नहीं रहने पर राजा ग्रहण करे।
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