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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 188
सर्वेषामप्यभावे तु ब्राह्मणा रिक्थभागिनः । त्रैविद्याः शुचयो दान्तास्तथा धर्मो न हीयते ।।
सब (औरस पुत्र, पत्नी, सपिण्ड आदि) के अभाव में वेदत्रय (ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद) के पढ़ने वाले, शुद्ध (शरीर सम्बन्धी ब्राह्म शुद्धि तथा मनः सम्बन्धी आभ्यन्तर शुद्धि से युक्त), जितेन्द्रिय ब्राह्मण ही मृत व्यक्ति के धन पाने के अधिकारी होते हैं, इस प्रकार धर्म (मृत व्यक्ति के पिण्डदानादि क्रिया) की हानि नहीं होती है।
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