अनन्तरः सपिण्डाद्यस्तस्य तस्य धनं भवेत् ।
अत ऊर्ध्व सकुल्यः स्यादाचार्यः शिष्य एव वा ।।
सपिण्डो में निकट सम्बन्धी मृतव्यक्ति के धन का भागी (हकदार) होता है तथा इसके बाद (सपिण्ड के अभाव में) क्रमश: समानोदक (सजातीय), आचार्य तथा शिष्य मृतव्यक्ति के धन का भागी होता है।
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