न भ्रातरो न पितरः पुत्रा रिक्थहराः पितुः ।
पिता हरेदपुत्रस्य रिक्थं भ्रातर एव च ।।
(पिता के) धन पाने का अधिकारी सहोदर भाई या पिता नहीं होते; किन्तु 'औरस' पुत्र (९।१६६) के अभाव में क्षेत्र' आदि पुत्र (९।१६६-१७६) ही पिता के धन पाने का अधिकारी होता है पुत्र (मुख्य पुत्र तथा स्त्री और कन्या) से हीन पुरुष के धन का भागी पिता या भाई होते हैं।
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