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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 184
श्रेयसः श्रेयसोऽलाभे पापीयान्रिक्थमर्हति । बहवश्चेत्तु सदृशाः सर्वे रिक्थस्य भागिनः ।।
(पूर्वोक्त ९।१४९-१६०) बारह प्रकार के पुत्रों में से उत्तम-उत्तम पुत्र के अभाव में हीन-हीन पुत्र (पिता के) धन का भागी होता है और सबके समान गुणी होने पर समान धन पाने के अधिकारी होते हैं।
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