य एतेऽभिहिताः पुत्राः प्रसङ्गादन्यबीजजाः ।
यस्य ते बीजतो जातास्तस्य ते नेतरस्य तु ।।
('औरस” पुत्र के वर्णन के) प्रसङ्ग में दूसरे के वीर्य से उत्पन्न जो ये (क्षेत्रज आदि पुत्र ९।१५९-१७८) कहे गये हैं, वे जिसके वीर्य से उत्पन्न होते हैं। उसी के हैं, दूसरे (क्षेत्रिक के) नहीं; (अतः “औरस” पुत्र (९।१५८) तथा 'पुत्रिका' (९।१२) के विद्यमान रहने पर उस क्षेत्रजादि पुत्रों को नहीं करना चाहिये)।
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