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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 180
्षेत्रजादीन्सुतानेतानेकादश यथोदितान्‌ । पुत्रप्रतिनिधीनाहुः क्रियालोपान्मनीषिणः ।।
इन क्षेत्रज? आदि ("औरस" पुत्र को छोड़कर शेष (९।१६९-१७८) ग्यारह प्रकार के पुत्रों का “श्राद्ध" आदि क्रिया का अभाव न हो” इसलिए मुनियों ने पुत्र (औरस' पुत्र) का प्रतिनिधि कहा है।
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