इन (स्त्रियों) का जातकर्मादि संस्कार (वेदोक्त) मन्त्रों से नहीं होता, यह धर्मशास्त्र की मर्यादा है; धर्मप्रमाण-श्रुति स्मृति से हीन और पापनाशक (वेदोक्त अघमर्षणादि) मन्त्रों के जप का अधिकार नहीं होने से पापयुक्त वे (स्त्रियाँ) असत्य के समान अपवित्र है यह शास्त्र की मर्यादा है (अतएव इनकी रक्षा यत्नपूर्वक करनी चाहिये।
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