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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 179
दास्यां वा दासदास्यां वा यः शूद्रस्य सुतो भवेत्‌ । सोऽनुज्ञातो हरेदंशमिति धमो व्यवस्थितः ।।
दासी (८।४१५) में, दासी की दासी में जो पुत्र शूद्र से उत्पन्न होता है, वह पिता से “तुम भी विवाहित स्त्री के पुत्रों के बराबर धन का भाग (हिस्सा) लो" इस प्रकार आज्ञा पाकर (पितृ-धन का) बराबर भाग लेने वाला होता है, ऐसी धर्म की व्यवस्था है।
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