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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 177
मातापितृविहीनो यस्त्यक्तो वा स्यादकारणात्‌ । आत्मानमर्पयेद्यस्मै स्वयंदत्तस्तु स स्मृतः ।।
माता-पिता से हीन अथवा उनसे निष्कारण त्यक्त (छोड़ा गया) पुत्र जिस पुरुष के लिए (पुत्ररूप होकर) अपने को समर्पण कर दे, वह उस पुरुष का "स्वयंदत्त" पुत्र कहलाता है।
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