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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 176
सा चेदक्षतयोनिः स्याद्वतप्रत्यागता5पि वा । पौनर्भवेन भर्त्रा सा पुनः संस्कारमर्हति ।।
यदि अक्षतयोनि वह स्त्री दूसरे पति के पास जावे और द्वितीय पति विवाह कर ले, अथवा कुमारावस्था वाले पति को छोड़कर दूसरे पति के पास जाकर पुनः प्रथम पति के पास जाने पर स्त्री के साथ वह प्रथम कुमार पति विवाह कर ले; तो वह उसकी 'पुनर्भू' स्त्री कहलाती है।
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