मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 172
पितृवेश्मनि कन्या तु यं पुत्रं जनयेद्रहः । कानीनं वदेन्नाम्ना वोढुः कन्यासमुद्भवम्‌ ।।
पितृ-गृह में रहती हुई कन्या (अविवाहित पुत्री) गुप्तरूप से जिस पुत्र को उत्पन्न करती है, उसे 'कानीन' पुत्र कहते हैं, तथा वह पुत्र कन्या के साथ विवाह करने वाले पति का होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें