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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 170
उत्पद्यते गृहे यस्तु न च ज्ञायेत कस्य सः । स गृहे गूढ उत्पन्नस्तस्य स्याद्यस्य तल्पजः ।।
जिसके घर में स्त्री को पुत्र उत्पन्न हो तथा “यह पुत्र समान जातिवाला है' ऐसा ज्ञात होते हुए भी “किससे उत्पन्न हुआ है?” यह मालूम नहीं हो; इस प्रकार गुप्त रूप से घर में उत्पन्न वह पुत्र जिस स्त्री से उत्पन्न होता है उसी के पति का 'गूढ' पुत्र कहा जाता है।
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