शय्यासनमलङ्कार कामं क्रोधमनार्यताम् ।
द्रोग्धृभावं कुचर्यां च स्त्रीभ्यो मनुरकल्पयत् ।।
शय्या, आसन, आभूषण, काम, क्रोध, कुटिलता, द्रोहभाव और दुराचरण - इनको स्त्रियों के लिए मनु ने सृष्टि के प्रारम्भ में ही बनाया (अत एव यत्नपूर्वक इनसे स्त्रियों को बचाना चाहिये)।
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