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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 169
सदृशं तु प्रकुर्याद्यं गुणदोषविचक्षणम्‌ । पुत्र पुत्रगुणै युक्तं स विज्ञेयश्च कृत्रिमः ।।
मनुष्य, गुण तथा दोष (समान जाति वाले माता-पिता के श्राद्ध आदि पारलौकिक क्रिया करना गुण तथा नहीं करना दोष) को जानने वाले एवं (माता-पिता आदि की) सेवा आदि कार्य से युक्त समान जाति वाले जिस पुत्र को अपना पुत्र मान लेता है, वह "कृत्रिम" पुत्र कहा जाता है।
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