माता पिता वा दद्यातां यमद्धिः पुत्रमापदि ।
सदृशं प्रीतिसंयुक्तं स ज्ञेयो दत्रिमः सुतः ।।
माता या पिता (ग्रहण करनेवाले) समान जातिवाले जिस पुत्र को (पुत्र के अभावरूप) आपत्तिकाल में प्रेमपूर्वक (भय या लोभ से नहीं) जल के साथ अर्थात् संकल्प कर देते हैं, उसे 'दत्त्रिम' (दत्तक, दत्त) पुत्र जानना चाहिये।
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