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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 165
औरसक्षेत्रजौ पुत्रौ पितृरिक्थस्य भागिनौ । दशापरे तु क्रमशो गोत्ररिक्थांशभागिनः ।।
(बारह प्रकार (९।१५९-१६०) के पुत्रों में से) केवल औरस तथा क्षेत्रजग्ये दो ही पुत्र पिता के धन के भागी होते हैं, शेष दस प्रकार के पुत्र तो क्रमशः गोत्र के समान पितृधन के भागी होते हैं।
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