(बारह प्रकार (९।१५९-१६०) के पुत्रों में से) केवल औरस तथा क्षेत्रजग्ये दो ही पुत्र पिता के धन के भागी होते हैं, शेष दस प्रकार के पुत्र तो क्रमशः गोत्र के समान पितृधन के भागी होते हैं।
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