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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 164
षष्ठं तु क्षेत्रजस्यांशं प्रदद्यात्पैतृकाद्धनात्‌ । औरसो विभजन्दायं पित्र्यं पञ्चममेव वा ।।
पिता के धन में से विभाजन (बँटवारा) करता हुआ औरस पुत्र, क्षेत्रज पुत्र का षष्ठांश या पञ्चमांस दे देवे।
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