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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 159
औरसः क्षेत्रजश्चैव दत्तः कृत्रिम एव च। गूढोत्पन्नोऽपविद्धश्च दायादा बान्धवाश्च षट्‌ ।।
औरस, क्षेत्रज, दत्तक, कृत्रिम, गूढोत्पन्न तथा अपविद्ध - ये ६ प्रकार के पुत्र दायाद (पितृधन के भागी) तथा बान्धव (पिण्डोदक देने अर्थात्‌ श्राद्ध एवं तर्पण करने वाले) होते हैं।
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