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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 155
ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्रापुत्रो न रिक्थभाक्‌ । यदेवास्य पिता दद्यात्तदेवास्य धनं भवेत्‌ ।।
ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य पिता से धन का भागी शूद्र स्त्री में उत्पन्न पुत्र नहीं होता किन्तु इसका पिता जो कुछ इसके लिए दे देता है, वही इस (शूद्र के पुत्र) का धन होता है।
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