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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 154
यद्यपि स्यात्तु सत्पुत्रो यद्यपुत्रोऽपि वा भवेत्‌ । नाधिकं दशमाददद्याच्छूद्रापुत्राय धर्मतः ।।
(ब्राह्मण यद्यपि समान जातिवाली स्त्रियों में उत्पन्न पुत्रवाला हो या पुत्रहीन हो; किन्तु धर्मानुसार शूद्रापुत्र के लिए दशमांश से अधिक धन पिता ब्राह्मण न देवे।
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