सर्व वा रिक्थजातं तहुशधा परिकल्प्य च ।
धर्म्यं विभागं कुर्वीत विधिनाऽनेन धर्मवित् ।।
अथवा सम्पूर्ण (पूर्व (९/१५०) के अनुसार 'उद्धार' भाग निकालने पर (बचे हुए) पितृ धन के दश भागकर धर्मज्ञाता पुरुष (९/१५३) इस प्रकार से विभाजन करे।
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