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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 151
त्र्यंशं दायाद्धरेद्विप्रो द्वावंशौ क्षत्रियासुतः । वैश्याजः सार्धमेवांशमंशं शूद्रासुतो हरेत्‌ ।।
(पूर्व (९-१५०) वचनानुसार "उद्धार” भाग करने के बाद बचे हुए पितृ धन में से) तीन भाग ब्राह्मणी का पुत्र, दो भाग क्षत्रिय का पुत्र, डेढ़ भाग वैश्या का पुत्र और एक भाग शाद्रा का पुत्र पाता है।
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