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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 150
कीनाशो गोवृषो यानमलङ्कारश्च वेश्म च । विप्रस्यौद्धारिकं देयमेकांशश्च प्रधानतः ।।
ब्राह्मणी में उत्पन्न पुत्र के लिए खेती करने योग्य एक बैल, (या हल तथा बैल), सवारी (घोड़ा आदि), भूषण, घर, इनमें से जो श्रेष्ठ हो, उनको सब भागों में से एक भाग देना चाहिये।
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