यदि ब्राह्मण (पति) की ब्राह्मणी आदि चारों वर्णो (ब्राह्मणी, क्षत्रिया, वैश्या तथा शूद्रा) की स्त्रियाँ हों तो उनमें उत्पन्न पुत्रों का यह (९।१५०-१५५) में कहा जानेवाला) विभाग का विधान है।
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