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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 147
या5नियुक्ता5न्यतः पुत्रं देवराद्वाऽ प्यवाप्नुयात्‌ । तं कामजमरिक्थीयं मिथ्योत्पन्नं प्रचक्षते ।।
कामवशीभूत जो स्त्री नियोग (९।५९-६१) से दूसरे (सपिण्ड व्यक्ति) या देवर से पुत्र प्राप्त करे, उस पुत्र को मनु आदि महर्षि कामजन्य, पितृधन का अनधिकारी और वृथोत्पन्न बतलाते हैं।
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